गरुड़ पुराण के 'प्रेतकल्प' के पांचवें अध्याय में लिखा है कि 'जो व्यक्ति मंदिर, देवता या धार्मिक कार्य के लिए समर्पित धन का दुरुपयोग करता है, वह कठोर दंड और पाप का भागी बनता है'. लेकिन जब किसी के अंदर मानवता निम्नतम स्तर पर पहुंच जाए, तो कोई क्या कह सकता है.
from Zee News Hindi: India News https://ift.tt/PNpvUnE
No comments:
Post a Comment