उसकी ख्वाहिशें एक कमरे में कैद थी. भूख पड़ौसियों के रहम की मोहताज और जिंदगी अपनों की बेकद्री के आलम में मल मूत्र से सनी हुई. अंधेरे के साए में रोशनी तलाशता एक उम्रदराज जीवन. मंजर देखकर ही किसी का भी दिल पसीज जाए, नहीं पसीजा तो बस केवल अपनों का. कुछ ऐसी ही कहानी है एक मां की जो जयपुर में अपनों की बेकद्री का शिकार होकर घुट घुटकर जीवन जीने को मजबूर है. आंसू आंखों में ही जमकर गीड़ बन गए. हाथ पैर के नाखून तीन से चार इंच तक बढ़ गए. इन हालातों में जीवन जीने को मजबूर हो रही एक मां की दास्तां सुनकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे. देखिए ये विशेष रिपोर्ट.जहाजपुर का नंबर न 1 न्यूज़ ब्लॉगर जहाजपुर भीलवाड़ा शहपुरा आसींद कोटडी आदि नगर की न्यूज़ सबे तेज जहाजपुर हलचल पर Thanks You Jahazpur
Sunday, 21 October 2018
अपनों की बेकद्री का शिकार कमरे में कैद एक बेबस 'मां' की कहानी
उसकी ख्वाहिशें एक कमरे में कैद थी. भूख पड़ौसियों के रहम की मोहताज और जिंदगी अपनों की बेकद्री के आलम में मल मूत्र से सनी हुई. अंधेरे के साए में रोशनी तलाशता एक उम्रदराज जीवन. मंजर देखकर ही किसी का भी दिल पसीज जाए, नहीं पसीजा तो बस केवल अपनों का. कुछ ऐसी ही कहानी है एक मां की जो जयपुर में अपनों की बेकद्री का शिकार होकर घुट घुटकर जीवन जीने को मजबूर है. आंसू आंखों में ही जमकर गीड़ बन गए. हाथ पैर के नाखून तीन से चार इंच तक बढ़ गए. इन हालातों में जीवन जीने को मजबूर हो रही एक मां की दास्तां सुनकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे. देखिए ये विशेष रिपोर्ट.
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