Sunday, 21 October 2018

सुदर्शनोदय तीर्थ क्षेत्र आवां में मुनि सुधासागर ने देश के विद्धवानों को दिया धर्म संदेश

बंथली. सुदर्शनोदय तीर्थ क्षेत्र आवां में अखिल भारतीय जैन विद्वत परिषद की आचार्य अमृतम चतुर्विश तीन दिवसीय संगोष्ठी गुरुवार मुनि सुधासागर महाराज के सान्निध्य में शुरू हुई।

 

आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुनि सुधासागर ने प्रवचन कर धर्म संदेश दिया। मंदिर समिति के चन्द्रप्रकाश हरसोरा, मुकेश ठग ने बताया कि संगोष्ठी में देश के कोने-कोने से आए विद्धवानों ने मुनि पुंगव से धर्म संदेश लिया।

 

इसके बाद महिलाओं के मंगल-गीतों के बीच मुनि की आहारचर्या हुई। सामायिक के बाद आए विद्ववानों व श्रद्धालुओं ने श्रीफल भेटकर मुनि का आशीर्वाद लिया। शाम को शिविर में मुनि सुधासागर ने लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।

 

इससे पहले सुबह श्रद्धालुओं ने मंदिर में भगवान का अभिषेक कर शांतिधारा की। इस मौके पर रमेशचन्द गोयल, पवनकुमार जैन, ओमप्रकाश ठग, अशोक धानोत्या सहित अन्य मौजूद थे।

 

मुनि सुधा सागर को श्रीफल भेंट किया
टोंक. शहर के जैन समाज के लोगों ने आवां में चातुर्मास कर रहे मुनि सुधासागर के दर्शन किए। समाज अध्यक्ष पारसमल बिलासपुरिया ने बताया कि समाज के लोग आवां पहुंचकर भगवान शांतिनाथ के दर्शनों के बाद मुनि सुधा सागर के दर्शन किए।

 

इस दौरान मुनि को श्रीफल भेंटकर टोंक आने का निवेदन किया। उन्होंने चंद्रप्रभु नसिया तेरापंथी पुरानी टोंक में नवनिर्मित मान स्तंभ में मुनि सुधा सागर के सान्निध्य में श्रीजी विराजमान कराने के लिए निवेदन किया।

इस अवसर पर समाज कोषाध्यक्ष चेतन कुमार, प्रवक्ता राजेश अरिहंत, सूरजमल, सम्भीरमल, रमेश चंद, छोटेलाल, सुरेंद्र, विनोद, महावीर, देवराज, प्रकाश, त्रिलोक चंद आदि मौजूद थे।

 

विधान सजाया
टोडारायसिंह. कस्बे स्थित आदिनाथ जिनालय में भक्तामर स्त्रोत पाठ का आयोजन किया गया। प्रवक्ता पवन सर्राफ ने बताया कि कार्यक्रम में आचार्य इन्द्रनंदी के सान्निध्य में भक्तामर विधान सजाया गया।

 

जहां श्रद्धालुओं ने भगवान की पूजा अर्चना कर जैन श्रद्धालुओं ने दीपक जलाकर संगीतमय भक्तामर स्त्रोत पाठ किया गया। पांच दिवसीय भक्तामर स्त्रोत कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।

 

संत को विदाई दी
मालपुरा. केकड़ी रोड स्थित रामद्वारे में विजयवर्गीय समाज की ओर से चातुर्मास के पूर्ण होने पर संत मस्तराम को विदाई दी गई। समाज अध्यक्ष मुरलीधर विजय, त्रिलोक विजय,रामबाबू क्याल, रामनारायण विजय सहित समाज के लोगों ने संत को विदाई देते हुए चार माह तक उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने तथा उनके द्वारा दिए गए आदर्शों को जीवन में धारण करने का संकल्प लिया। संत मस्तराम ने कहा कि संत पानी के समान होता है, जो निरन्तर बहते रहते है उनमें कभी भेदभाव नहीं पाया जाता है।

 



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