Thursday, 18 October 2018

जम्मू कश्मीर के बाद सबसे अशांत राजस्थान, चुनौती होंगे चुनाव !

जयंत शर्मा
जयपुर। राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर सरकार की चिंता बढऩे लगी है। पहली बार है कि इस बार विधानसभा चुनाव में करीब डेढ़ लाख पुलिसवाले राजस्थान में मौजूद रहेंगे। इनमें आईपीएस अफसर से लेकर सिपाही तक शामिल हैं। ये संख्या पिछले विधानसभा चुनाव से कहीं ज्यादा है।

 

दरअसल, पांच साल के दौरान प्रदेश में मामूली झगड़ों के बाद इतनी बार सांप्रदायिक तनाव हुए हैं कि दर्जनों बार नेट बंद करना पड़ा है। यही कारण है कि इस बार चुनाव से पहले पहली बार डीजीपी खुद संभाग स्तर पर दौरा कर रहे हैं ताकि सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा कर सकें।

 

सांप्रदायिक झगड़ों के कारण सबसे ज्यादा नेटबंदी

जम्मू-कश्मीर के बाद राजस्थान दूसरा राज्य है, जहां पिछले चार साल में मोबाइल इंटरनेट सबसे ज्यादा बार बंद हुआ। साल 2015 से अब तक जम्मू कश्मीर में 100 व राजस्थान में 32 बार इंटरनेट बंद रहा। पिछले 6 वर्ष में देश में 172 बार इंटरनेट शटडाउन हुआ। इन अधिकारिक आंकड़ों में अगस्त माह के आंकड़े जोड़ते हैं तो राजस्थान में नेटबंद की संख्या और बढ़ी है। अनुमान के तौर पर 2015 से अब तक राजस्थान में 3२ बार इंटरनेट बंद हो चुका है। राजस्थान में सबसे पहले यह रोक 2015 में भीलवाड़ा में लगाई गई थी, जब एक युवक की मौत के बाद सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी।

 

125 से ज्यादा बार तनाव

जयपुर समेत प्रदेश के 19 जिलों में गुजरे साढ़े चार साल के दौरान 125 बार से भी ज्यादा तनाव हो चुका है। इनमें जयपुर के अलावा टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, भरतपुर, करौली, भीलवाड़ा, नागौर, बूंदी, करौली, उदयपुर, अजमेर समेत अन्य कई जिले शामिल हैं। यही कारण है कि इस बार करीब दो हजार से ज्यादा कस्बों में फोर्स पैदल मार्च करेगी। इन दो हजार कस्बों में अधिकतर तनाव वाले क्षेत्र हैं।

 

चार हजार से ज्यादा संवेदनशील केंद्र

राजस्थान में विधानसभा चुनाव में 4038 संवेदनशील क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं, जिसमें तीन लाख 74 हजार मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। निर्वाचन विभाग ने किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा तंत्र और निगरानी व्यवस्था की है। इसके तहत कुल सुरक्षा बल का 16 फीसदी सुरक्षा बल इन क्षेत्रों के आठ हजार मतदान केन्द्रों में रहेगा।

 

इस तरह से बदलते गए चुनाव

साल 2013 से लेकर अब तक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चुनाव बदलते ही गए। हर बार पहले से ज्यादा सुरक्षा की जरूरत महसूस हुई। साल 2013 में विधानसभा चुनाव में संवेदनशील क्षेत्र 6092 चिंह्नित किए गए थे। साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में संवेदनशील क्षेत्र 5367 रह गए थे। इस बार सरकार ने अभी तक 4038 संवेदनशील क्षेत्र चिंह्नित किए हैं। अफसरों की मानें तो इनकी संख्या चुनाव से पहले बढ़कर छह हजार के पार तक जा सकती है।



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