Friday, 19 October 2018

सिर्फ मानवेन्द्र ही नहीं, ये 'दिग्गज' भी बिगाड़ रहे राजस्थान में चुनावी समीकरण

जयपुर। राजस्थान में अब तक एक बार भाजपा और एक बार कांग्रेस की सरकार बनने की परम्परा रही है। देखगा होगा कि इस बार यह इतिहास बदलेगा या कांग्रेस के सिर जीत का ताज सजेगा। 7 दिसंबर को मतदान होना है जिसके बाद तस्वीर मतगणना के बाद 11 दिसंबर को ही साफ़ होगी। लिहाज़ा सत्ता का सुख भोगने की उम्मीद लिए भाजपा और कांग्रेस के साथ ही अन्य दल भी चुनाव की तैयारी में जुट गए हैं। इधर, उप चुनाव में मिली जीत से कांग्रेस जोश में है और उसे जीत की पूरी उम्मीद है।

 

वहीं भाजपा अपने काम और मोदी लहर पर सवार होकर एक बार फिर से जीत की आस में चुनावी ताल ठोक रही है। आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, भारत वाहिनी पार्टी और हनुमान बनीवाल की पार्टी (29 अक्टूबर को ऐलान होना है) और अन्य दल भी चुनावी मैदान में है। इस बीच अगर नजर दौड़ाएं तो राजस्थान में सीएम राजे के खिलाफ लोगों की कड़ी नाराजगी देखी जा रही है। लोग सोशल मीडिया में उनके खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। यह नाराजगी चुनावों में भाजपा को भारी पड़ सकती है। सत्ताधारी भाजपा के लिए कांग्रेस से अधिक परेशानी बड़े वोट बैंक माने जाने वाले समाजों से आने वाले दिग्गज नेताओं से भी रहेगी।

 

ये बागी नेता भाजपा व राजे के खिलाफ माहौल खड़ा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजपूत नेता मानवेंद्र सिंह का कांग्रेस में जाना पश्चिमी राजस्थान में भाजपा के लिए बड़े नुकसान की ओर इशारा कर रहा है। मानवेंद्र के अलावा इस सूची में हनुमान बेनीवाल और घनश्याम तिवाड़ी का नाम भी शामिल है। खास बात यह है कि ये सभी नेता अलग-अलग समुदायों से हैं और इनका अपने समुदाय में काफी प्रभाव है। विश्‍लेषकों के मुताबिक ये नेता कांग्रेस का कम और भाजपा को ज्‍यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।

 

ये 'दिग्गज' पहुंचा सकते हैं भाजपा को नुकसान

 

मानवेंद्र सिंह
जसोल परिवार से ताल्‍लुक रखने वाले मानवेंद्र सिंह का शानदार राजपूत इतिहास रहा है। इस परिवार का राजपूत समाज में बहुत सम्मान है। ऐसे में उनका कांग्रेस में जाना भाजपा के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, जबकि कांग्रेस इसे मास्टर स्ट्रोक के रूप में देख रही है।

 

दरसअल, गत लोकसभा चुनाव में जसवंत का टिकट कटने के बाद से राजपूत समाज में भाजपा के प्रति गहरी नाराजगी रही। बाद में आनंदपाल एनकाउंटर सहित कई अन्य घटनाओं से भी इस समाज की नाराजगी भाजपा के प्रति और बढ़ गई।

 

मानवेंद्र के 'हाथ' का दामन थामने के बाद कांग्रेस, भाजपा से नाराज राजपूत समाज को अपनी तरफ आसानी से लुभा पाएगी। मानवेंद्र के पाला बदल लेने से मारवाड़ के सारे समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। इसके साथ ही कांग्रेस मानवेन्द्र का उपयोग पूरे प्रदेश में स्टार प्रचारक के रूप में कर सकती है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की मानेें तो इससे प्रदेश की चुनावी फिजा पूरी तरह से बदल सकती है।

 

घनश्याम तिवाड़ी
एक लोकप्रिय ब्राह्मण चेहरे के तौर पर घनश्‍याम तिवाड़ी का शेखावाटी और जयपुर के आसपास अपने समुदाय के लोगों में अच्‍छा प्रभाव माना जाता है। भाजपा से छह बार विधायक रह चुके घनश्‍याम तिवाड़ी दो बार मंत्री रहे हैं।

 

तिवाड़ी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की कार्यशैली से नाराज रहे जिसके बाद उन्‍होंने इस साल जून में भाजपा से नाता तोड़ लिया था। इसके बाद उन्होंने नए राजनीतिक दल 'भारत वाहिनी पार्टी' का गठन किया।

 

घनश्याम तिवाड़ी का मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से खफा होकर अपनी अलग पार्टी बना लेना भी भाजपा की जीत की राह में रोडे़ बढ़ा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि घनश्‍याम तिवाड़ी की पार्टी करीब 15 सीटों पर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकती है। इन सीटों पर ब्राह्मण मतदाता काफी तादाद में हैं।

 

हनुमान बेनीवाल
गत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से नाराजगी के चलते जाट समुदाय ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया था। यही कारण रहा कि भाजपा को उसकी खुद की उम्मीद से कहीं अधिक 163 सीटों पर जीत हासिल हुई। अब जाट नेता हनुमान बेनीवाल खुद 29 अक्टूबर को जयपुर में होने वाली हुंकार रैली में अपनी पार्टी का ऐलान करने वाले हैं। ऐसे में भाजपा की राह और कठिन हो जाएगी।

 

हनुमान बेनीवाल पहली बार वर्ष 2008 में भाजपा के टिकट पर खींवसर से विधायक बने थे, लेकिन बाद में वसुंधरा राजे के साथ मतभेद के बाद उन्‍होंने भाजपा छोड़ दी थी। वर्तमान में वे खींवसर से निर्दलीय विधायक हैं। बेनीवाल का जाट समाज और युवाओं में खासा प्रभाव माना जाता है। ऐसे में उनकी पार्टी के आने के बाद जाट समाज का उनके पाले में जाना तय माना जा रहा है। बेनीवाल का दावा है कि वे नागौर से भाजपा को एक भी सीट नहीं जीतने देंगे।

 

आपको बता दें कि राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटों में से 50 से अधिक सीटों पर जाट समाज का दबदबा है और करीब 40 से अधिक सीटों पर ये समाज उलटफेर करने की क्षमता भी रखता है। राजस्थान में इस समाज से आने वाले किसानों की संख्या भी अच्छी खासी है।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2AiiqWg
via IFTTT

No comments: