Sunday, 21 October 2018

राजस्थान, MP और छत्तीसगढ़ का सियासी संग्राम- इंतजार और सवाल के बीच सियासी संवेदनाएं

अनंत मिश्रा

जयपुर। राजनीति में जो दिखता है वो असल में होता नहीं है और जो होता है वह नजर नहीं आता। तीन राज्यों के चुनाव की गर्मी बढऩे लगी है। छत्तीसगढ़ में पहले दौर के चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने में अब दो दिन का समय बचा है। कांग्रेस के 12 नाम सामने आ चुके है तो भाजपा की पहली सूची का सबको इंतजार है। उम्मीद थी पहली सूची शनिवार दोपहर तक आने की फिर शाम होते होते रात हो गई। भाजपा मुख्यालय में टिकटों की कवायद चलती रही और रात 8:30 बजे सूची जारी हुई। इसमें 77 प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए। पार्टी के जानकार बताते है कि टिकट वितरण में मुख्यमंत्री रमन सिंह की चल रही हैं। थोड़ी बहुत सौदान सिंह की भी। कांग्रेस भी अपने बचे 78 नामों को आखिरी रूप देने में जुटी है।

आरोप-प्रत्यारोपों के इस दौर में कुछ पल सुकून देने वाले भी मिल जाते हैं। धोरों की धरती राजस्थान में शनिवार को ऐसा ही नजारा देखने को मिला। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के निधन पर आयोजित शोक सभा में ढ़ाढ़स बंधाने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी पहुंची। भाजपा के 98 प्रत्याशियों की रायशुमारी बैठक को छोड़कर जोधपुर पहुुंचना राजनीति में आई कटुता को कम करने के प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है। शिष्टाचार मुलाकातों को छोड़कर दोनों नेताओं को बीच मेल मुलाकातें कम ही होती हैं। शनिवार को जोधपुर में पूरी कांग्रेस नजर आईं। भाजपा जयपुर के एक रिसोर्ट में पार्टी उम्मीदवारों के चयन में व्यस्त रही।

अब बात मध्यप्रदेश की। डेढ़ दशक से सत्ता की सवारी कर रही भाजपा को अपदस्थ करने के लिए कांग्रेस कोई कसर नहीं छोड़ रही। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने भाजपा पर आज पहला सवाल दागा। कमलनाथ 40 दिन तक भाजपा को यूं ही घेरते रहेंगे। गुजरात के छोकरे हार्दिक पटेल ने भी आज राज्य के अलीराजपुर से हुंकार भरी। पटेल भाजपा को हराने के लिए युवाओं को एकजुट करने में लगे हैं। भाजपा के केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भोपाल में युवा मोर्चा के पदाधिकारियों का मन टटोलन पहुंचे। प्रयास प्रत्याशियों के चयन का है।

सवाल सत्ता का है लिहाजा हर दल सभी मोर्चों को संभालने में जुटा हैं। राजनीति धर्म पर भी हो रही है तो बूथों को मजबूत करने की कवायद भी चल रही है। दूसरे दलों के नेताओं को पार्टी में लाने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं। टिकट नहीं मिलने पर असंतोष को थामने की रणनीति पर भी सभी दल चौंकने हैं। चुनाव की तारीखें जैसे जैसे नजदीक आएगी, गुलाबी सर्दी में चुनावी गर्मी बढ़ती जाएगी। जरूरत सब घटनाओं पर नजर रखने की है।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2PbwUzd
via IFTTT

No comments: