Friday, 28 December 2018

स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर नगर निगम गंभीर नहीं, रात की सफाई में भी दिन जैसे ही मिले हालात

जयपुर. स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर नगर निगम गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है। हालात यह है कि अब तक रात में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया जा सका है। जबकि पिछले साल इन दिनों में रात को पांच से सात घंटे सफाईकर्मी शहर की सफाई में जुट गए थे।

राजधानी की सफाई व्यवस्था देखने के लिए राजस्थान पत्रिका टीम रात 8.30 बजे से 11.00 बजे तक शहर की अलग-अलग सड़कों पर निकली। हालात यह थे कि कहीं पर भी सफाईकर्मी नहीं दिखे। इसको लेकर निगम के जिम्मेदारों का अलग-अलग मत हैं। उधर स्थिति यह है कि महापौर पद का चार्ज लेने के बाद भी सफाई सर्वेक्षण पर कागजों से रणनीति बाहर नहीं निकल पाई है।

महापौर मनोज भारद्वाज ने कहा कि सर्दी में सफाईकर्मी झाडू लगाकर जल्द चले जाते हैं। वहीं स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति के चेयरमैन का कहना है कि संविदाकर्मियों के निकाले जाने के बाद अभी तक रात में सफाई शुरू ही नहीं हुई है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर कहां गए 8000 सफाईकर्मी? उधर, स्वच्छता सर्वेक्षण के नोडल अधिकारी विनोद पुरोहित का कहना है कि प्रत्येक वार्ड को कम से कम 65 सफाईकर्मी दे रखे हैं। ये सब काम कहां और कब कर रहे हैं, इस बारे में उनको जानकारी नहीं है।

यहां पहुंची पत्रिका टीम
झालाना, जवाहर नगर, ट्रांसपोर्ट नगर, गलता रोड, रामगंज बाजार, बड़ी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार, चौड़ा रास्ता, चांदपोल बाजार, संसार चंद रोड, एमआइ रोड, नेहरू बाजार किशनपोल बाजार, इंदिरा बाजार, रामनिवास बाग, अल्बर्ट हॉल, जेके लोन अस्पताल, त्रिमूर्ति सर्किल, नारायण सिंह सर्किल, रामबाग, जनपथ, लालकोठी, विवि मार्ग, 22 गोदाम पुलिया, सहकार मार्ग।

परकोटे में बुरा हाल
सबसे बुरा हाल तो परकोटे में ही दिखाई दिया। गलता गेट रोड पर जगह-जगह कचरे के ढेर दिखे। इतना ही नहीं चौड़ा रास्ता में कचरा पात्रों से कचरा बाहर निकल रहा था। ऐसी ही स्थिति चांदपोल बाजार में भी दिखाई दी। नाहरगढ़ रोड के तिराहे पर तो आवारा जानवर कचरे में खाना तलाशते हुए नजर आए। वहीं नगर निगम मुख्यालय पहुंचे तो वहां आसपास रखे कचरा पात्र भी पूरी तरह से कचरे से अटे हुए थे। मुख्यालय की बांउड्री से सटे कचरा पात्रों का भी कचरा खाली नहीं हुआ था। जेके लोन अस्पताल के सामने भी ऐसे ही हालात थे।

इनसे लें सीख
लोग सफाई के प्रति जागरूक तो हैं, मगर निरंतरता की कमी है। दिल्ली रोड पर पान की थड़ी के बाहर एक दुकान-दार झाड़ू लगाता मिला। पूछने पर बोला- दो साल से सफाई कर रहा हूं। निगम टीम कई बार यहां से गुजरी पर मेरा चालान नहीं हुआ। यह दुकानदार रोज शाम को घर जाने से पहले वहां फैले कचरे को डस्टबिन में डालता है।

यह है स्थिति
1850 टन कचरा प्रतिदिन निकलता है शहर के 91 वार्डों से
65 सफाईकर्मी (कम से कम) लगे हैं प्रत्येक वार्ड में
400 टन कचरा निकलता है प्रतिदिन चारदीवारी से
8000 सफाईकर्मी आखिर कहां गए



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