Thursday, 14 March 2019

चिकित्सा विभाग ने की बड़ी चूक, मिलावटखोरों को दे दिया ये बड़ा अवसर

विकास जैन/जयपुर. चिकित्सा विभाग खाद्य सामग्रियों में मिलावट का लगातार खुलासा कर रहा है लेकिन मसालों में मिलावट के बड़े पैमाने पर चल रहे काले कारोबार पर लगाम कसने की ओर उसका ध्यान नहीं है। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावटी मसाले कैंसर का बड़ा कारण हैं। राजधानी में लोग हर माह 8 लाख किलो मसाले खा रहे हैं। इनमें 35 प्रतिशत मसाले मिलावटी होने का अनुमान है क्योंकि पिछले साल राज्य में हुई जांच में इतने मसाले मिलावटी पाए गए थे।

मिलावट की जड़ों तक पहुंचने की बजाय चिकित्सा विभाग ने बड़ी चूक कर दी है। विभाग को खाद्य सामग्री में मिलावट के खिलाफ अभियान छेड़े 11 मार्च को एक महीना पूरा हो जाएगा। इस दौरान विभाग ने लगातार कार्रवाई कर मिलावट के खुलासे किए लेकिन इस काले कारोबार की जड़ तक नहीं पहुंच पाया है। पुख्ता तैयारी और योजना के बिना मैदान में उतरकर, फौरी कार्रवाई कर विभाग ने बड़े मिलावटखोरों को भूमिगत होने का अवसर दे दिया है।

घरों से कारखानों तक बनते, खुले भी बिकते मसाले
शहर में मसाले घरों से लेकर फैक्ट्रियों तक जगह-जगह बनाए जा रहे हैं। खाद्य पदार्थ पर निर्माता का नाम, एक्सपायरी तिथि आदि लिखे होने चाहिए लेकिन बाजार में खुले मसाले भी धड़ल्ले से बिक रहे हैं। जिम्मेदारों का इस पर भी ध्यान नहीं है।

सर्वाधिक मिलावट मसालों में, कैंसर का खतरा इसी से
जानकारों के अनुसार खाद्य सामग्रियों में मिलावट इंसान और पशु दोनों के लिए जानलेवा हो सकती है। सर्वाधिक मिलावट मसालों में होती है और स्वास्थ्य के लिए यही सबसे ज्यादा घातक है। कैंसर का बड़ा कारण भी यही है।

सेहत के लिए इतना तो करना ही होगा
- जहां तक सम्भव हो, मसाले घर पर ही पीसें या बनाएं
- घर पर मसाले पीसना सम्भव न हो तो बाजार में अपनी आंखों के सामने मसाले पिसवाकर लाएं
- तैयार मसाले खरीदें तो पहले परखें, फिर घर लाएं

मसालों और मिलावट का गणित
40 लाख की आबादी है जयपुर की, ताजा अनुमान के मुताबिक
06 लाख किलो मसालों का उपभोग होता है शहर में हर माह
04 लाख किलो मसाले घरों में खपते हैं हर माह
02 लाख मसाले होटल-रेस्त्रां व ढाबों में खपते हैं हर माह

किसमें कैसे पहचानें मिलावट
लाल मिर्च पाउडर : ईंट या कबेलू का बारीक पिसा पाउडर मिला हो सकता है। पानी में डालने पर लाल मिर्च पाउडर पानी पर तैरे तो शुद्ध, डूब जाए तो मिलावटी।
हल्दी पाउडर : मेटानिल पीला नामक रसायन या पीला रंग मिला हो सकता है। कुछ बूंद हाइड्रोक्लोरिक एसिड और उतनी ही बूंदें पानी की डालने पर हल्दी पाउडर गुलाबी या बैंगनी हो जाए तो वह मिलावटी होगा।
दाल चीनी : गरम मसाले में काम ली जाने वाली दाल चीनी में अमरूद की छाल मिलाई जाती है। हाथ पर रगडऩे पर इसका रंग दिखे तो असली, अन्यथा मिलावटी होगा।
काली मिर्च : पपीते के बीज मिलाए जाते हैं। पानी में डालने पर काली मिर्च तैरने लगे तो नकली, डूब जाए तो शुद्ध।
राई या सरसों के दाने : वजन बढ़ाने के लिए अर्जेमोने के बीज मिलाए जाते हैं। शुद्ध राई को दबाने पर पीला पदार्थ निकलता है जबकि अर्जेमोने के बीजों को दबाने पर सफेद।
धनिया पाउडर : चूड़ा या गेहूं की भूसी मिलाई जाती है। पीला करने के लिए रंग मिलाया जाता है, जो सेहत के लिए घातक होता है।



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