कोटा. विद्यार्थियों की परीक्षाएं सिर पर है। हाथों में टाइम टेबिल आ गया, लेकिन किताबें नहीं आई। मामला राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल जयपुर का है। स्टेट ओपन की परीक्षा 27 मार्च से शुरू हो रही है, लेकिन विद्यार्थियों को अभी तक किताबें नहीं मिली। स्टडी केन्द्रों पर सम्पर्क करने पर उन्हें किताबें नहीं आना बताया जा रहा है। हालांकि कुछ किताबें आई हैं। आधी-अधूरी किताबों के चलते विद्यार्थियों को पासबुकों के सहारे परीक्षा की तैयारी करनी पड़ रही है।
एक विद्यार्थी के अनुसार उसने जुलाई में12वीं की परीक्षा के लिए आवेदन किया था। इसके बाद कुछ किताबें उसे मिल गई। लेकिन अधिकतर विषय की किताबें नहीं मिली। सम्बन्धित केन्द्र पर पता करने पर किताबें नहीं आना बताया। ऐसे कई विद्यार्थी हैं, जिन्हें कुछ किताबें भी नहीं मिली है। शिक्षा आसान, राह कठिन स्टेट ओपन ऐसे विद्यार्थियों को आसानी से शिक्षा दिलाने के लिए है जो कारणवश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में नहीं बैठ पाते या नौकरी करते हुए पढ़ाई करना चाहते हैं।जानकारी के अनुसार स्टेट ओपन से एक कक्षा को पास करने के लिए पांच साल का समय मिलता है।इसमें 9 चांस मिलते हैं। जिन प्रश्न पत्रों को विद्यार्थी पास कर लेता है, उसका पेपर उसे दोबारा नहीं देना पड़ता।
जबकि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में फैल होने पर दोबारा से सभी प्रश्न पत्र देने पड़ते हैं। 1200 से 1500 विद्यार्थी सूत्रों के अनुसार जिले में स्टेट ओपन से परीक्षा के लिए 6 संदर्भ केन्द्र बनाए गए हैं। रामपुरा में महात्मा गांधी स्कूल स्थित केन्द्र से इस सत्र की परीक्षा के लिए करीब 250 विद्यार्थियों ने आवेदन किया है। शेष में कहीं इससे कम तो कहीं इतने संभव है।& विद्यार्थियों को अधिकतर किताबें उपलब्ध करवा दी है, हो सकता है जयपुर में किताबों की कमी है। जैसे ही और किताबें आएंगी उपलब्ध करवा दी जाएगी। योगेन्द्र सिंह भारद्वाज, संदर्भ केंद्र रामपुरा, राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल|
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