भीलवाड़ा ।
मौसम ने एक दम से करवट ली है। जिले के आस पास के क्षेत्रों में मावठ की हल्की बारिश से मौसम में भी नमी आ गई है। हल्की बूंदाबांदी के साथ आसमान में बादल छाए रहे। इसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ सकता है। खासकर ऐसे मौसम में जीरा, ईसबगोल व अफीम की फसल में कीट लगने के साथ रोग होने की संभावना है। खड़ी सरसों में नुकसान तो नहीं लेकिन कटी फसल में नुकसान हो सकता है। विभाग के अनुसार इसी तरह का मौसम रहता है तो किसानों की जीरे व ईसबगोल की फसल के लिए की गई मेहनत पर पानी भी फिर सकता है। इससे किसान चिंता में नजर रहे हैं।
जिले भर में बुधवार को आसमान में बादलों ने डेरा डाल रखा। हल्की बूंदाबांदी भी हुई है। जो फसलों के लिए इतनी नुकसानदायी नहीं है, लेकिन इससे फसलों में कीट लगने की आशंका बनी रहती है। किसानों को फसलों के उत्पादन में सहायक सिद्ध होने वाली औषधियों का इस्तेमाल कर पूरी तरह सावधानी भी रखनी होगी। अगर कीट लगने पर आवश्यक दवाई का छिड़काव नहीं किया तो किसानों को नुकसान भी झेलना पड़ सकता है।
कृषि विभाग का कहना है कि यह मौसम जीरे व ईसबगोल की फसल के लिए अनुकूल नहीं है। अन्य फसलों में भी कीट की आशंका रहती है। किसान कीटनाशक दवाईयों का छिड़काव कर फसलों का बचाव कर सकते है। फसलों के लिए करें बचावदो दिन से मौसम के उतार चढाव से रबी की फसलों को नुकसान हो सकता है।
जीरा, इसबगोल व अफीम में कीट व रोग की आशंका
बारानी कृषि अनुसंधान केन्द्र के प्रोफेसर डॉ. ललित कुमार छाता ने बताया कि वातावरण में हल्की बूंदा-बांदी से नमी या आद्र्रता बढ गई है। इससे जीरे में झुलसा रोग बढने की आशंका है। नियंत्रण के लिए किसान 2 ग्राम डायथेन एम-45 फफूंदनाशी को एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इसबगोल फसल में नमी से उपज की गुणवत्ता खराब हो सकती है। अफीम फसल में चीरे लगाकर दूध (अफीम) इक_ा करने में भी व्यवधान पड़ सकता है। साथ ही डोडे पर अन्य फफूंद संक्रमण से अफीम की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। तापमान बढने के उपरान्त फसलों में मोयला कीट भी नुकसान कर सकता है। जीरे की फसल में मोयला जीरे के पौधों से रस चूसकर उपज को प्रभावित कर सकता है। किसान मोयला नियंत्रण के लिए एक मिली रोगोर या आधा मिली इमिडाक्लोप्रिड प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कर सकते है।
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