Sunday, 11 October 2020

रामभरासे छोड़ी शहर में कोविड-19 की गाइडलाइन

भीलवाड़ा .
कहने को जिला प्रशासन ने सरकारी कार्यालयों में नो मास्क-नो एंट्री के संकेतक लगाते हुए कार्मिकों को सख्ती से कोविड-19 की गाइड लाइन पालन करने के निर्देश दे दिए है। लेकिन शहर की व्यवस्थाओं को रामभरोसे ही छोड़ दिया गया है। प्रशासन की लचर व्यवस्थाओं के चलते शहर में जमकर कोविड-19 की गाइडलाइन की धज्जियां उड़ाई जा रही है। प्रशासन की ओर से जरूरी कार्य होने पर घरों से बाहर निकलने की हितायतें दी जा रही है, लेकिन इसका असर कितना है, यह देखने वालों कोई नहीं है।
जिले में भले भी कोरोना पॉजीटिव की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, लेकिन बावजूद इसके जिले में बड़ी संख्या में लोग सावधानी नहीं बरत रहे है। शहर व कस्बों के बाजारों में ना तो सोशल डिस्टेंसिंग की पालना हो रही है और ना ही मास्क पहनने में लोग रूचि दिखा रहे है। हालांकि जिलेभर में पुलिस की ओर से कोविड-19 की गाइड लाइनों की पालना कराने के लिए सख्ती बरतने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसका असर कहीं-कहीं ही नजर आ रहा है। ऐसे में संक्रमण का खतरा खुलकर मंडराता नजर आ रहा है। जिले में कोरोना पॉजीटिवों की संख्या भी प्रशासन को चेताने का कार्य कर रही है, लेकिन शहर की व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। शहर के बाजारों में बड़ी संख्या में लोगों को तफरीह करते हुए देखा जा सकता है। कई दुकानों पर तो लोगों को बेवजह ही बैठे देखा जा सकता है। यहां ना तो सोशल डिस्टेसिंग की पालना हो रही है और ना ही संक्रमण रोकने के लिए सैनेटाइज का उपयोग।
मास्क पहनने का दिखावा, सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ रही धज्जियां
शहर व कस्बों के बाजारों में आने-जाने वालों की ओर से मास्क की ओर रूचि नाममात्र की नजर आ रही है। पुलिस भी इस दिशा में मूक दर्शक बन गई है। प्रशासन व पुलिस भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों की पालना को पहल करता नजर आ रहा है, लेकिन लोग बड़ी संख्या में बिना मास्क के आ-जा रहे है। शहर के मुख्य बाजार, सदर बाजार, गोल प्याऊ चौराहा, गुलमंडी, धानमंडी, आजाद चौक, पुराना भीलवाड़ा, भोपालक्लब के सामने स्थित दुकानों में आदि स्थानों पर नियमों की अवहेलना करते हुए भीड़ का लगना जारी है। ऐसा लग रहा है कोरोना वायरस का खतरा भी खत्म हो गया है। पुलिस ने शुरूआती दौर में तो कोविड-19 की गाइड लाइनों पर सख्ती भी दिखाई, लेकिन हाल में इस ओर पुलिस ने ध्यान देना ही बंद कर दिया है।
शहर में मास्क गांवों में गायब
शहर में फिर भी लोगों के मुंह पर मास्क लटका नजर आता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में तो वह भी नजर नहीं आ रहा है। गांवों में मास्क है न सोशल डिस्टेंसिंग। सेनेटाइजर का तो नाम ही नहीं है। फिर भी वहां संक्रमण का खतरा कम है, लेकिन शहर में हालात बिलकुल अलग है।



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