टोंक. दुनियाभर में हर जगह कोई कोई ना कोई कई ऐसी विशेष चीज होती है, जिसके लिए उस जगह को जाना-पहचाना जाता है। इसी तरह नवाबों की नगरी टोंक में भी मिश्री मावे (दूध का हलवा) ने अपनी अलग ही पहचान बनाई हुई है। ईद हो दिपावली दोनों प्रमुख त्यौहारों पर यहां के हलवे की विशेष मांग रहती है।
अपने स्वाद ओर शुद्धता के लिए प्रदेश सहित विदेशों तक बारह महिनों इसकी मांग रहती है। इस मावे की खास बात यह भी है कि शुगर के मरीज भी इसको आसानी से खा लेते है। इसी का परिणाम है कि 60 साल से भी पहले शहर के पांच बत्ती क्षेत्र में छोटी सी दूकान से रामेश्वर हलवाई के नाम से शुरू हुआ सफर आज रामेश्वर नमकीन व स्विट कॉर्नर के रुप में अपनी सफलता की कहानी खुद बयां कर रहा है।
वर्तमान में इस कार्य को देख रहे सूरज साहू ने बताया कि पांच बत्ती क्षेत्र में 150 साल पूर्व उनके दादाजी धूल्या तेली एक किराने की दूकान किया करते थे। उनके गुजरने के बाद पिताजी रामेश्वर ने दूकान पर बैठना शुरू कर दिया। साथ ही पिताजी हलवाई का काम भी किया करते थे। पिताजी द्वारा सन 1960 के आसपास मिठाई ओर नमकीन की शुरूआत की। साहू ने बताया कि चार साल पहले पिताजी का भी निधन हो गया। लेकिन आज भी लोगों का वो ही विश्वास व प्यार बना हुआ है। जिसके कारण आज हम इस मुकाम पर है।
साहू ने बताया कि पिताजी के अनुसार शुरू में प्रतिदिन पांच से सात किलो मिश्री मावा की खपत हो जाती थी , तब भाव भी 10 रूपए किलो हुआ करता था। आज 40 से 50 किलो मिश्री मावे की खपत आम दिनों में हो जाती है। वर्तमान में भाव भी 300 रूपए किलो है। साहू ने बताया कि उनके यहां शुरू से ही मावा बनाने के लिए बिना क्रीम निकला हुआ शुद्ध दूध ही काम में लिया जाता है। रोजना एक क्विटल दूध का मिश्री मावा तैयार किया जा रहा है।
साथ हि अन्य मिठाईयों में भी स्वंय के कारखाने में तैयार किया हुआ ही मावा काम में लिया जाता है। त्यौहारी सीजन में इसकी दोगूनी मांग बढ़ जाती है। साहू ने बताया कि पिताजी की ही तरह कारखाने में श्रमिकों के बावजूद वो स्वंय भी इसी कार्य में लगे हुए हुए। साहू ने भी बताया कि उनके क्षेत्र में मुस्लिम बाहुल्य होने के कारण शुरू से लेकर अब तक अधिक ग्राहकी भी इन्ही लोगों की रही है।
यहां तक की प्रदेश के अलावा देश- विदेश सहित सऊदी अरब व पाकिसतान में रहने वाले मुस्लिम परिवारों के कई लोग व रिश्तेदारों के यहां भी आए दिन मिश्री मावे की मांग रहती है। साहू ने बताया कि गत 12 सालों से उन्होनें लोगों को सुबह के नाश्ते के तौर पर कचौरी के साथ दही जलेबी का काम शुरू किया है। जिसकों भी लोगों ने काफी पसंद किया है। साथ ही उनके यहां सभी प्रकार की मिठाईयों सहित शुद्ध मुंगफली के तेल व घर पर तैयार किए मसालों से कई प्रकार की नमकीन सहित अन्य चीजें तैयार की जा रही है।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/3kdzv7k
via IFTTT
No comments:
Post a Comment