Wednesday, 17 October 2018

हमारी अफीम का कम हुआ दम, नहीं खरीद रही दुनिया

कोटा. भारतीय किसानों की ओर से अफीम में की जा रही मिलावट से खराब हो रही गुणवत्ता से विश्व में इसकी मांग तेजी से गिर रही है। इसके चलते दवाइयों के लिए जापान, अमरीका व फ्रांस ने भारतीय अफीम की खरीद बंद कर दी है। ऐसे में उत्तरप्रदेश के गाजीपुर व मध्यप्रदेश के नीमच में अफीम फैक्ट्रियों के गोदामों में भारी स्टॉक होने से नई अफीम रखने की समस्या बन गई है।

मार्फिन से मापी जाती है गुणवत्ता
विश्व में अफीम की गुणवत्ता इसमें मौजूद मार्फिन की मात्रा से मापी जाती है। जिस अफीम में जितनी मार्फिन होगी, उसकी गुणवत्ता भी उतनी ही अच्छी होगी। भारतीय अफीम में मार्फिन की मात्रा वजन के हिसाब से काफी कम होने से इसकी मांग तेजी से कम हुई है।

इन देशों ने झाड़ा पल्ला

देश की ड्रग इंडस्ट्रीज में करीब 30 फीसदी अफीम ही काम आती है। इसके अलावा करीब 70 फीसदी एक्सपोर्ट होती है। ये अफीम जापान, फ्रंास, यूके, यूएस, इराक व इरान में जाती है, लेकिन अब यूएस व यूके का भारतीय अफीम से मोहभंग हो गया है। इससे इन देशों ने भारतीय अफीम की खरीद बंद कर दी है।

मार्फिन की मात्रा से ही होगी खरीद
अफीम के मामले में बिगड़ती भारत की साख को देख केन्द्र सरकार ने नई अफीम नीति में अफीम की खरीद के लिए हर वर्ष प्रति हैक्टेयर अफीम की किलोग्राम में तय की जाने वाली मात्रा के स्थान पर इस वर्ष मार्फिन की मात्रा के आधार पर खरीद तय की है। अब तक अफीम 4.9 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर के हिसाब से खरीदी जाती है, अब अफीम काश्तकारों को 5.9 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से अफीम जमा करवानी होगी।

मिलावट का रहता है जोर

भारत की अफीम की सरकारी कीमत और अवैध बाजार में कीमत में बड़ा अंतर है। ऐसे में कई किसान अवैध बाजार में अफीम बेच मोटी राशि कमाने के फेर में रहते हैं। इसके चलते किसान नारकोटिक्स ब्यूरो में जमा करवाने वाली अफीम में मिलावट करते हैं। अमूमन अफीम में स्टार्च, मिल्क पाउडर, शुगर, प्रोटीन पाउडर जैसे पदार्थों की मिलावट की जाती है। नारकोटिक्स ब्यूरो में अफीम की गाढ़ेपन की ही जांच की जाती है। 70 फीसदी गाढ़ेपन से निर्धारित किलोग्राम अफीम ली जाती है। अफीम जमा होने के बाद इसे गोदामों में भेजा जाता है, जहां इसके परीक्षण के बाद लाइसेंसवार इसमे मार्फिन की मात्रा का रिकॉर्ड बनाया जाता है।

खरीद कम होने से गोदाम ठसाठस
भारत की अधिकांश अफीम उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश व राजस्थान में पैदा होती है। भारत में इसे रखने के लिए मप्र के नीमच व उप्र के गाजीपुर में दो सरकारी अफीम एवं क्षारोध कारखाने व गोदाम हैं। दोनों ही कारखानों के गोदामों में अफीम ठसाठस भरी है। वर्तमान में यहां करीब 6 सौ टन अफीम संग्रहित है, जबकि वर्ष में करीब 180 टन अफीम ही दवाओं में काम आती है। ऐसे में विभाग के पास तीन वर्ष से अधिक का स्टॉक है। गोदामों में अपे्रल के अंत में पहुंचने वाली अफीम रखने को लेकर अभी से विभाग चिंता में है।

10 आरी के दिए पट्टे

अफीम की मांग कम होने से सरकार की ओर से इस वर्ष किसानों को केवल 10 आरी (एयर) के पट्टे दिए गए हैं, जो एक हैक्टेयर का दसवां भाग होता है, जबकि इससे पहले सरकार की ओर से किसानों के अधिक पट्टे होने के बावजूद 50 आरी (एयर) तक के पट्टे भी जारी किए जाते थे।

केन्द्र सरकार की ओर से मार्फिन की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया जा रहा है। केन्द्र सरकार की ओर से नई अफीम नीति में गुणवत्ता सुधारने के लिए इस बार मार्फिन का लेवल 4.9 प्रति हैक्टेयर से बढ़ाकर 5.9 किया गया है। सरकार की नीति के अनुसार पट्टों का वितरण किया जा रहा है। विदेशों में मांग कम हुई है। फैक्ट्रियों में भी पर्याप्त माल मौजूद है।
- डॉ. सहीराम मीणा, उपायुक्त, नारकोटिक्स विभाग, कोटा

 



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