Friday, 19 October 2018

जीवन मार्गदर्शन के लिए गुरु जरुरी

उदयपुर . मुनि शास्त्र तिलक विजय ने कहा कि जीवन के कल्याण के लिए जीवन में गुरु का होना आवश्यक है। वे से.-4 स्थित शांतिनाथ जिनालय में आयोजित प्रवचन सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन में सही राह पर एक सद्गुरु ही चलना सिखाता है।

संकल्प लेकर पूरा करने का सामथ्र्य हो
महाप्रज्ञ विहार में आचार्य शिव मुनि ने कहा कि पूरा विश्व एक कुटुम्ब की भंाति है, जिसमें कोई छोटा-बड़ा, अमीर-गरीब नहीं है। सभी जीव एक आत्मा है। जिस दिन ऐसी आत्म दृष्टि सभी में आ जाएगी तो अपने आप स्वयं में स्थिर हो जाओगे। आप में ज्ञाता दृष्टा भाव आ जाएंगे कि मैं आत्मा हूं। मनुष्य जीवन में अनेक बार कार्य पूरा करने का संकल्प लेता है, लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाता है। इसलिए उसे जीवन में संकल्प को पूरा करने का सामथ्र्य पैदा करना चाहिए।

तप से आत्मा होती है शुद्ध

हुमड़ भवन में जिन सहस्रनाम विधान पूजन के दौरान आयोजित धर्मसभा में सुमित्र सागर ने कहा कि अग्नि से सोना शुद्ध होता है, वैसे ही तप से आत्मा शुद्ध होती है। जिसका हृदय पवित्र नहीं, उदार नहीं उसका जप, तप, पूजा सब निरर्थक है।

आचार्य भगवंतों का उपकार
आराधना भवन में चातुर्मास कर रहे पन्यास प्रवर श्रुत तिलक विजय ने कहा कि आचार्य का अर्थ है, जो स्वयं पंचाचार का पालन करे। दूसरों से भी करवाए। हम पर आचार्य भगवंतों का उपकार है।

आत्म शोधन की प्रक्रिया है तप

आयड़ ऋषभ भवन में चातुर्मास कर रहे मुनि प्रेमचंद ने कहा कि तप आत्म शोधन की प्रक्रिया है। जैन संस्कृति एवं श्रमण संस्कृति तप: प्रधान संस्कृति है, तप श्रमण संस्कृति का प्राण तत्व है, जीवन की श्रेष्ठ कला है,आत्मा की अन्त: स्फूर्त पवित्रता है, जीवन का दिव्य आलोक है, आत्मशोधन की प्रक्रिया है।

गुरु पर्व मनाया
तरुण क्रांति मंच गुरु परिवार की ओर से गुरुवार सुबह गुरु पर्व मनाया गया। णमोकार महामंत्र जाप गुणानुवाद गीत का आयोजन हुआ। लाभार्थी अनिल लुणदिया ने बताया कि भक्ति गीतों की प्रस्तुति हुई। विनीत जैन को सम्मानित किया गया।



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