Thursday, 18 October 2018

ट्रैप कैमरे में कैद हुआ पैंथर का मूवमेंट

धरियावद. तहसील क्षेत्र के हांडाखेड़ा साबाफला में पैंथर के हमले का शिकार हुई मासूम बालिका सजिया की मौत के एक सप्ताह बाद भी पैंथर विभाग की पकड़ से दूर है। इससे सम्बंधित गांवों के लोग अभी भी डर और दहशत के बीच रात गुजारने को मजबूर है। वहीं मंगलवार रात को करमेलिया वनखंड के मायाखेड़ी में लगाए गए ट्रैप कैमरे में पैंथर की गतिविधियां कैद हुई है। पैंथर ने सोमवार को जिस गाय का शिकार किया था, ट्रैप कैमरे में उसे खाता हुआ नजर आया। टै्रप कैमरे में आई तस्वीरों को जांच के लिए बुधवार सुबह विशेषज्ञों एवं उच्चाधिकारियों को जयपुर भेज दी गई है। इधर, करमेलिया वन खंड के लाम्बीकलम में बुधवार शाम पैंथर ने एक गाय पर हमला कर दिया। वहां से वह जंगल की ओर भाग गया। वन विभाग ने लाम्बीकलम में पिंजरा लगा दिया है।

जाखम नदी किनारे भी मिले पगमार्क
इधर डरा गांव में जाखम नदी के किनारे भी पैंथर के पगमार्क मिले है। इसके बाद वन विभाग ने आसपास के क्षेत्रों के ग्रामीणों को एहतिहात बरतने के निर्देश दिए गए। सहायक वन सरक्षंक सुबोधकुमार सिंह एवं क्षेत्रीय वन अधिकारी दारासिंह राणावत ने बुधवार को करमेलिया वनखंड के गांवों का सघन दौरा किया और रेस्क्यू में लगी टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बदली थी कैमरों की दिशा एवं जगह
क्षेत्रीय वन अधिकारी दारासिंह राणावत ने बताया कि सोमवार को मायाखेड़ा में लगे ट्रैप कैमरों की जगह एवं दिशा बदली गई थी। इसके बाद मंगलवार को पैंथर की मूवमेंट कैमरे में कैद हुई। कैमरे में पैंथर की 50 से अधिक तस्वीरें कैद हुई, जिन्हें जांच के लिए भेज दिया गया है।

वयस्क पैंथर होने की संभावना
क्षेत्रीय वन अधिकारी राणावत ने बताया कि टै्रप कैमरे में कैद तस्वीरों एवं विशेषज्ञों से चर्चा के बाद अनुमान लगाया जा रहा कि पैंथर ७ से 10 वर्ष के बीच का एवं पूर्णत: वयस्क है। पैंथर की स्थिति पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

2 दिन से भूखा था पैंथर
राणावत के अनुसार ट्रैप कैमरे में आई तस्वीरों से पता चलता है कि पैंथर दो दिन से भूखा था। दो दिन पूर्व सोमवार को देवला के मायाखेड़ी के जंगल में उसने जिस गाय का शिकार किया था। ग्रामीणों के हो-हल्ला होने के बाद उसे वहीं छोड़ गया था। पैंथर ने दूसरे दिन आकर शिकार को चट कर गया। संभवत: दो दिन से भोजन नहीं मिलने से पैंथर ज्यादा भूखा था, इसलिए उसे शिकार का ७५ फीसदी से अधिक हिस्सा चट कर लिया।

400 से 500 हैक्टेयर में किया मार्चपास्ट
पिछले एक सप्ताह से तीन ग्राम पंचायतों के सात गांवों के ग्रामीणों के खौफ बन चुके पैंथर की तलाश में विभाग की टीमों ने धरियावद एवं सीतामाता वन्यजीव अभयारण्य में मार्च पास्ट किया। विभाग की पांच संयुक्त टीमों के 50 सदस्यों ने करमेलिया वनखंड, हांडाखेड़ा, डरा गांव, मातामंगरी, मायाखेड़ी, साबाफला, कपड़वास, लाम्बीकलम दिनभर पैंथर की तलाश की, लेकिन देर शाम तक पैंथर दिखाई नहीं दिया।



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