टोडारायसिंह. लंका विजय के बाद शनिवार को रामलीला मंचन में भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक किया गया। नगरपालिका की ओर से शिवकृपा करौली गंगापुरसिटी के तहत आयोजित रामलीला मंचन में राम के राज्याभिषेक देखने दर्शको की भीड़ उमड़ी।
कार्यक्रम के तहत राम व उसकी सेना ने रावण समेत सैन्य क्रम का संहार कर लंका विजय के बाद राम, सीता व लक्ष्मण समेत हनुमान व सेना पुष्पक विमान से अयोध्या पहुंचे। जहां राम के आगमन पर अयोध्या को दुल्हन की तरह सजावट की गई। राम का राज्याभिषेक हुआ। राम दरबार की झांकी सजाई गई।
जिसे देखने दर्शकों की भीड़ उमड़ी। नगरपालिका की ओर से पालिका प्रतिनिधी आशीष गुप्ता, महावीर गौड़, रामसहाय सैनी आदि मौजूद थे।
पीठाधीश्वर का आज होगा मंगल प्रवेश
मालपुरा. अन्तर्राष्ट्रीय रामस्नेही समाज की रामनिवास धाम शाहपुुरा जिला भीलवाड़ा के पीठाधीश्वर स्वामी रामदयाल का सोमवार को प्रात: 9 बजे केकड़ी रोड स्थित रामद्वारा धाम में मंगल प्रवेश होगा।
विजयवर्गीय समाज मालपुरा के अध्यक्ष मुरलीधर व महामंत्री हनुमान प्रसाद ने बताया कि इस मौके पर समाज की ओर से अगवानी की जाकर रामद्वारा में मंगल प्रवेश कराया जाएगा। यहीं धर्मसभा का आयोजन होगा। धर्मसभा के पश्चात उपखण्ड के सोड़ा ग्राम स्थित रामद्वारा धाम के लिए मंगल विहार करेंगे।
अखण्ड रामचरित मानस की हुई पूर्णाहुति
निवाई. दादिया गांव में स्थित बालाजी मंदिर में शनिवार से चल रही अखण्ड रामचरित मानस की रविवार की सुबह पूर्णाहुति हुई। श्रीराम चरित मानस के अखण्ड पठन की पूर्णाहुति के अवसर पर विधि विधान मंत्रोच्चार के साथ पूजा अर्चना की।
इसके बाद भगवान गणपति, रामचरित मानस ग्रन्थ व हनुमानजी की आरती की गई। इस दौरान गोपाली देवी, मधुबाला गौतम, शशि प्रभा शर्मा, धनंज्य शर्मा, हीरालाल गुर्जर सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद थे।
पीपलू में कथा को लेकर निकाली कलशयात्रा
टोंक. पीपलू के श्रीचारभुजानाथ मंदिर में संगीतमय भागवत कथा को लेकर कलशयात्रा निकाली गई। बालकिशन पाराशर ने बताया कि कथा को लेकर शिवालय परिसर में भागवत ग्रन्थ, कलश एवं ध्वज पूजा अर्चना की गई।
इसके बाद पुरुष श्रद्धालु सिर पर भागवत ग्रन्थ तथा हाथों में ध्वज पताका लिए जयकारे लगाते हुए चले। वहीं महिला श्रद्धालु सिर पर कलश धारण किए मंगल गीत गाते एवं नाचते हुए चली। कथा कस्बे के शिवालय रोड, पंचायत, महावीर चौक, कोतवाली झण्डा, गणेश मंदिर होती हुई श्रीचारभुजा मंदिर पहुंची।
जहां व्यासपीठ पर विराजित होकर आचार्य कैलाशचंद तेहरिया ने भागवत कथा का सार सुनाया। कथा में भक्ति भजनों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य किया। कथा का विश्राम आरती एवं प्रसादी वितरण पर हुआ।
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