टोंक. अंजुमन तामीरे उर्दू टोंक की ओर से शायर मुराद सईदी की याद में मुशयरा व अवार्ड समारोह का आयोजन शनिवार रात खलीलिया मदरसे में हुआ। सचिव अनवर अली ने बताया कि समारोह में मुख्य अतिथि कांग्रेस अभाव अभियोग के प्रदेश सहसंयोजक सऊद सईदी थे।
अध्यक्षता एपीआरआईके संस्थापक निदेशक शौकतअली खां ने की। विशिष्ट अतिथि केप्टन शमशेर खान व एपीआरआई के निदेशक डॉ. सोलतअली खां ने की। समारोह में बुजुर्ग शायर सफदर अली खां, युवा शायर डॉ. शोएब सैफी व रजा शैदाईको स्मृति चिह्न व स्मरण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
मुशायरे की शुरुआत एजाज फाइजी व मोहम्मद इमरान ने नात-ए-पाक से की। इसके बाद जयपुर के रजा शैदाई ने ‘न तेरे सितम की शिकायतें, न तेरी जफा का मलाल है, तुझे बेवफा न कहे कोई, मुझे हर घड़ी ये ख्याल है’ पेशकर लोगों की दाद लूटी।
जाय निम्बाहेड़वी ने ‘भूल जाने में जिनको जमाने लगे, आज फिर वो हमें याद आने लगे’, खुश्तर चाकसू ने ‘अदा दिलगीर होती जा रही है, नजर भी तीर होती जा रही है’, सवाईमाधोपुर के रेहान फारुकी ने ‘मुझको खुद से कभी गाफिल नहीं होने देता, जागता रहा है हर वक्त सुखनवर मेरा’, जयपुर के एजाज शिहाब ने ‘एक-एक पल में यहां सैकड़ों गम काटते हैं, जिंदगी कटती कहां है इसे हम काटते हैं’ पेशकर लोगों से वाह-वाही लूटी।
एजाज फाइजी ने ‘वो मेरे आलमे दिल से है, बेखबर-बेखबर-बेखबर’, शाद कैफी ने ‘तुगाफुल की है कोई इन्तेहा भी, दिया है दर्दे तो दीजिए दवा भी’, नदीम सैफी ने ‘जुल्म ढाने का अगर आप हुनर रखते हैं, हम भी गम सहने को पत्थर का जिगर रखते हैं’, अंजुम सैफी ने ‘झूठ बोलू यह मेरे दिन को गवारा ही नहीं, सच का इजहार जो करता हूं तो सर जाता है’, डॉ. शोएब सैफी ने ‘खुद अपनी जात का इदराक जब करा देगा, मुझे अपना की बलंदी से वो गिरा देगा’, डॉ. सोहेल पयामी ने ‘दिल की होती है कैफीयत ऐसी, शाख पर जैसे फूल खिलता है’ पेशकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
मुशायरे में सलीमुद्दीन खां, जुनेद असलम, मिर्जा नसीम बैग, यूसुफ यूनिवर्सल, अहमद शहजाद, लियाकत अली, फरीद अहमद, रियाज मोहम्मद, मोहम्मद अजमल, अब्दुल खालिद, वजीर मोहम्मद, मुजाहिद हुसैन, अतहरुल हक आदि मौजूद थे।
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