सिकन्दर पारीक/उदयपुर. दक्षिण राजस्थान में खरपतवार समझकर जिन पौधों को लोग उखाड़ रहे हैं, वे मुंह तथा फेफड़ों के कैंसर से लडऩे की रामबाण औषधी निकली है। इसकी पत्तियों के सेवन से हार्ट अटैक से बचा जा सकता है। एक शोध में बेहतर परिणाम सामने आने के बाद अब इनके संरक्षण की दिशा में कार्य शुरू कर दिया गया है। इनमें लूनिया, बथुआ प्रमुख खरपतवार है। सर्दी में अभी गेहूं के साथ बथुवा (चील) सर्वाधिक हो रहा है। इसी तरह अन्य खरपतवार में बोखना, कंरिजड़ा, रजन, धीमड़ा भी शरीर को पोषक तत्व देने में उपयोगी है।
गांधीजी की थी प्रिय सब्जी
गांधी के वर्धा आश्रम में प्रतिदिन लूनिया की सब्जी बनती थी। किस्सा है आश्रम में खाने का खर्चा अधिक होने पर ऐसी सब्जी बनाने को कहा, जिसमें कम खर्च हो। जंगल में की गई खोज लूनिया पर आकर टिकी। वर्षों तक उसकी सब्जी बनी।
इतना है महत्व
लूनिया
- मुंह व फेफड़ों के कैंसर में उपयोगी
- इनका सेवन मछली के तेलों की तुलना में अधिक स्वास्थ्यकारी है।
- हृदय रोग स्ट्रोक के जोखिम को कम किया जा सकता है।
- पेट की बीमारियां दूर होती है।
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बथुआ
- यह भी कैंसर से लडऩे में बहुपयोगी है।
- बथुआ की पत्तियों में विटामिन ए की सर्वाधिक मात्रा
- सर्दियों में इसका सेवन कई बीमारियों को दूर रखने में मदद करता है।
- पत्तियां वात, पित, कफ नाशक है। पेट के कीड़ों का नाश करने वाला है।
शोध में बेहतर परिणाम मिले
बांसवाड़ा की वागधरा संस्थान व भूमिका संस्थान ने पोषण संवेदी खेती तंत्र परियोजना के तहत इनकी अहमदाबाद की प्रयोगशाला में जांच करवाई, जिसमें पोषक तत्वों के बेहतर होने की प्रमाणिक जानकारी मिली है। संस्थान सचिव जयेश जोशी ने बताया कि इनके संरक्षण के लिए उदयपुर, बांसवाड़ा व डूंगरपुर जिले में कार्य चल रहा है।
इनका कहना है
यह शोध में प्रमाणिक हो चुका है कि लूनिया, बथुआ जैसे खरपतवार कैंसर से लडऩे की ताकत रखते हैं। शीघ्र ही अन्य बेहतर नतीजे सामने आने वाले हैं। - प्रो. कामिनी कौशल, द्रव्य-गुण विभाग प्रमुख, राजकीय आयुर्वेद कॉलेज, उदयपुर
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