कोटा. आंख की बीमारी कालापानी (ग्लूकोमा) पीडि़त मरीजों के लिए अच्छी खबर है। अब उन्हें इलाज के लिए ज्यादा पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे। एमबीएस अस्पताल में ही मरीज इसकी जांच करवा सकेंगे। अस्पताल के नेत्र विभाग में 42 लाख की लागत से आप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) जांच मशीन स्टॉल हुई है। इससे हाड़ौती के मरीजों को फ ायदा होगा। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. गिरीश वर्मा ने शुक्रवार को इसका लोकार्पण किया। अस्पताल में फिलहाल फंड्स फ्लोरेंस एंजियोग्राफी 'ग्रीन लेजरÓ मशीन से मरीजों की जांच होती थी। ग्लूकोमा की जांच के लिए उन्हें निजी अस्पताल में करीब 2 हजार रुपए खर्च करने पड़ते थे। अब अस्पताल में सुविधा शुरू होने से न्यूनतम दर पर जांच की सुविधा मिल सकेगी। अस्पताल के नेत्र विभाग ओपीडी में रोजाना 150 से 200 मरीज पहुंचते हैं। इनमें से 10 से 15 मरीज ग्लूकोमा बीमारी से ग्रसित होते हैं।
धीरे-धीरे जाती है आंखों की रोशनी
यहां आयोजित ग्लूकोमा सेमिनार में प्राचार्य डॉ. वर्मा ने कहा कि ग्लूकोमा आंख से जुड़ी ऐसी बीमारी है, जिससे रोशनी धीरे-धीरे चली जाती है। इसका पता तब चलता है जब आंख को 20 से 30 फीसदी नुकसान हो चुका होता है। निजी अस्पतालों में महंगी जांच के कारण कई बार मरीज ग्लूकोमा की जांच नहीं करवा पाते। एमबीएस अस्पताल में नई टेक्नोलॉजी की मशीन से ग्लूकोमा जांच की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। नेत्र विभाग के एचओडी डॉ. अशोक मीणा ने बताया कि ग्लूकोमा को साइलेंट कीलर भी कहा जाता है। डॉक्टरों को इसके लक्षण नहीं मिलते। यह दो तरह का होता है। एंगल क्लोजर और ओपन एंगल। ओपन एंगल बहुत ज्यादा कॉमन है। इसे ही साइलेंट कीलर के तौर पर जाना जाता है। आई स्पेशलिस्ट इसलिए इसका जल्द इलाज कराने की सलाह देते हैं। चिकित्सकों की माने तो जिन लोगों का नम्बर की वजह से बार- बार चश्मा बदल रहा हो, जिनको इंद्र धनुष जैसी सर्कल दिखाई दे रही हो, ब्लड प्रेशर, डाइबिटीज हो, जिनकी उम्र 40 से ज्यादा हो उन्हें एक बार ग्लूकोमा जांच अवश्य करानी चाहिए।
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