1999 में एक साल बाद हुए आम चुनावों में दोनों दलों द्वारा दोबारा वहीं प्रत्याशी मैदान में थे लेकिन इस बार रामनारायण मीणा की जगह रघुवीर सिंह कौशल ने चुनाव जीता...
कोटा. लोकसभा चुनावों में मंत्री-विधायकों को टिकट न देने की गाइडलाइन टूटती नजर आ रहा ही है। विधायकों को टिकट देने का दबाव इतना है कि अब पार्टी यह कह रही है कि ऐसी कोई गाइडलाइन तय ही नहीं हुई । कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अपवाद स्वरूप कुछ विधायकों पर पार्टी दांव खेल सकती है, पार्टी को हर हाल में जीताऊ उम्मीदवार की तलाश है।
दरअसल प्रदेश कांग्रेस ने सभी सीटों पर सिंगल पैनल के नाम तय कर दिए हैं। लेकिन कई जगह जातिगत समीकरणों की वजह से पेंच फंसा हुआ है। कोटा-बूंदी लोकसभा सीट पर भाजपा द्वारा मौजूदा सांसद को टिकट देने की खबर के बाद अब कांग्रेस को यहां जीताऊ उम्मीदवार की तलाश हैं । ऐसे में जो नाम सबसे अधिक चर्चा में है जिले की ही पीपल्दा विधानसभा से विधायक रामनारायण मीणा का है। पहले ये माना जा रहा था कि पार्टी मीणा की वरिष्ठता को देखते हुए मंत्री बना सकती है लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो ये कयास लगाए गए कि उन्हें लोकसभा चुनाव में कोटा-बूंदी सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है और एयर स्ट्राइक के बाद बदले माहौैल के बाद अगर पार्टी की गाइडलाइन बदलती है तो रामनारायण मीणा का दावा मजबूत माना जा रहा है । गौरतलब है कि रामनारायण मीणा कोटा से सांसद रह चुके हैं।
13 महीने सांसद रह पाए थे मीणा..
1998 के चुनावों में रामनारायण मीणा ने भाजपा के प्रत्याशी और दिवंगत नेता रघुवीर सिंह कौशल को हराया था लेकिन अटल जी वजह से मीणा केवल 13 महीनों तक ही इस सांसद रह पाए थे। दरअसल 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार 13 महीने तक चल पाई थी। एक वोट से सरकार गिरने के बाद राजस्थान समेत पूरे देश में वाजपेयी के पक्ष में सहानुभुति की लहर थी। 1999 में एक साल बाद हुए आम चुनावों में दोनों दलों द्वारा दोबारा वहीं प्रत्याशी मैदान में थे लेकिन इस बार रामनारायण मीणा की जगह रघुवीर सिंह कौशल ने चुनाव जीता।
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