उदयपुर. कैंसर लाइलाज बीमारी है लेकिन इससे जिंदगी खत्म नहीं हो सकती है। जज्बा, अत्मविश्वास, जागरूकता और अपनों के सपोर्ट से जंग-ए-जिंदगी में कैंसर को मात दी जा सकती है। यह साबित कर दिखाया है अभिनेता इरफान खान ने। 2018 में इरफ़ान खान ने बताया था कि वो एक ख़तरनाक बीमारी से पीडि़त हैं, उन्हें ‘न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर’ हैं, अपने इलाज के लिए इरफ़ान लंदन गये थे। अपनी बीमारी से लड़ते इरफान ने कई बार सोशल मीडिया पर भी अपना दर्द अपने फैंस से साझा किया. जयपुर में पैदा हुए इरफान ने बॉलीवुड में जो मुकाम हासिल किया, उसके पीछे उनकी सालों की मेहनत है। उदयपुर में शुक्रवार को शूटिंग के दौरान इरफान के हावभाव से भी नहीं लगा कि वे किसी गंभीर बीमारी से पीडि़त हैं। यहां शूटिंग के दौरान पत्रिका ने उनसे सवाल किया कि गंभीर बीमारी से उठकर अब जिन्दगी कैसे लग रही है। उदयपुरवासियों को क्या संदेश देंगे? इस पर इरफान मुस्करा दिए, बोले कुछ नहीं।
2002 में बदली किस्मत, 18 को बीमारी ने जकड़ा
इरफान की किस्मत बदली 2002 में रिलीज हुई आसिफ कपाडिय़ा की फिल्म द वारियर से। इस फिल्म में इरफान को इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलाई. इसके बाद 2003 में इरफान की फिल्म हासिल और मकबूल रिलीज हुई. इन दोनों ही फिल्मों ने इरफान को बॉलीवुड में शोहरत दिलाई. 2003 के बाद इरफान के करियर की गाड़ी निकल पड़ी। दमदार अदाकारी के लिए उन्हें 2011 में पद्मश्री से नवाजा गया। सब कुछ ठीक चल रहा था कि मार्च 2018 में उन्हें अपनी गंभीर बीमारी के बारे में पता चला।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal http://bit.ly/2I3I9Xq
via IFTTT
No comments:
Post a Comment