जयपुर।
राजस्थान में रिक्त पड़े प्रधानाध्यापक के पदों को लेकर बड़ी खबर है। अब प्रदेश में दूर के जिलों में भी प्रिंसिपल के पद रिक्त नहीं रहेंगे। हाल ही शिक्षा विभाग ने इसके लिए नियमों में कुछ बदलाव किया है।
शिक्षा विभाग के बदलाव के अनुसार ऐसे जिले जिनमें प्रिंसिपल के 10 प्रतिशत से अधिक पद रिक्त हैं, उन पदों को प्राथमिकता से भरा जाएगा। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और प्रधानाध्यापक के पदों को भरने के लिए रविवार को काउंसलिंग भी हुई है। शिक्षा विभाग ने अपनी वेबसाईट पर ऐसे जिलों के ही रिक्त पद दर्शाए हैं जिनमें 10 प्रतिशत से अधिक प्रिंसिपल के पद रिक्त हैं।
पदस्थान की राह देख रहे शिक्षकों को लगेगा झटका
वहीं, दूसरी ओर प्रिंसिपल पद पर नजदीक के जिलों में पदस्थान की राह देख रहे शिक्षकों को इससे झटका लगेगा। वे अब नजदीक के जिलों में नहीं आ सकेंगे। करौली, कोटा, बूंदी, चूरू, हनुमानगढ़, सवाईमाधोपुर, सीकर, अलवर, टोंक, अजमेर, झुन्झुनू, दौसा और जयपुर जिले में कुल स्वीकृत पदों में से 90 प्रतिशत से अधिक प्रिंसिपल के पद भरे हुए हैं। इस वजह से इन 13 जिलों की रिक्तियों को विभाग की वेबसाईट पर नहीं दिखाया गया है।
रिक्त हैं 1800 प्रिंसिपल के पद
मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में लगभग 1800 प्रिंसिपल के पद रिक्त हैं। प्रिंसिपल की काउंसलिंग में आशार्थियों की संख्या अधिक है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने हाल ही काउंसलिंग के नियमों में कुछ बदलाव किया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि छात्र हित और विद्यालयों की आवश्यकता को देखते हुए अब 20 जिलों में ही पदस्थापन किया जाएगा।
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