कोटा. शहर के बीच परकोटे के भीतर जगत माता मंदिर में देवी के नौ रूप विराजमान हैं। नित नए शृंगार और आयोजनों की बहार के बीच गत वर्षों में शहर और बाहर मंदिर की विशेष पहचान बन गई है। मंदिर में स्थापित जगत माता की प्रतिमा प्राचीन बताई जाती है। मंदिर के पुजारी जगत सुखवानी बताते हैं कि देवी प्रतिमा भवन में दबी हुई थी। इसका पता चलने पर प्रतिमा को निकलवाया और वर्तमान स्थान पर विराजमान किया। मंदिर का नाम जगत माता रखा गया। धीरे धीरे देवी के दर्शन से लोगों के कार्य सधते चले गए और मंदिर का रूप भव्य होता चला गया।
कुछ जयपुर से कुछ बंगाल से आई देवियां मंदिर में वर्तमान में स्थापित नौ देवियों में से चन्द्रघंटा, ब्रह्मचारिणी व सिद्धिदात्री देवी की प्रतिमा को कोलाकाता से लेकर आए। शेष प्रतिमाओं को जयपुर से लाकर विधिवत स्थापित किया। देवी के नौ स्वरूपों के अलावा लक्ष्मी व नारायण, राधा कृष्ण, शिव परिवार, हनुमान, गणेश, साई बाबा, झूलेलाल, भैरव व करीब छह फीट ऊंची शनिदेव की प्रतिमा विराजमान है। आदमकद शनि प्रतिमा को कुछ वर्ष पूर्व ही विराजमान किया है।
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प्राचीनता के साथ आधुनिकता भी
मंदिर में प्राचीनता के साथ आधुनिकता के दर्शन भी होते हैं। मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं के अनुसार देवी श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करने वाली है। इसी के चलते कई श्रद्धालु मंदिर में मन्नतों के धागे बांधकर जाते हैं। लोग बताते हैं कि देवी श्रद्धालुओं पर ऐसी कृपा बरसाती है कि श्रद्धालु एक बार देवी के दर पर आता है, फिर आता चला जाता है।
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वर्ष भर विशेष
चैत्र, शारदीय या गुप्त नवरात्र या अन्य कोई खास अवसर। यहां हर पर्व श्रद्धा व हर्षोल्लास से मनाया जाता है। कभी गुफा में वैष्णो देवी के दर्शन तो कभी बाबा अमरनाथ की झांकी और कभी महाकाल की तर्ज पर भस्मीय आरती और श्रद्धालुओं का मेला।
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