कोटा. केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) कोटा थर्मल की सुरक्षा को लेकर दिनोंदिन सख्ती बढ़ाने में जुटा है। मुख्यालय और इंटेलीजेंस इनपुट के बाद सीआईएसएफ ने प्लांट के अंदर आने वाले वाहनों की सख्ती से जांच करने और सिर्फ एक साल के लिए ही गेट पास जारी करने की व्यवस्था शुरू की है। हालांकि थर्मल कर्मचारी इसे लेकर अपना विरोध जता रहे हैं।
अधिकारियों के वाहनों को पहले एक बार में ही तीन से पांच साल तक का गेट पास जारी कर दिया जाता था, लेकिन पुलवामा आतंकी हमले के बाद थर्मल की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ ने इंटेंलीजेंस इनपुट और मुख्यालय से निर्देश के बाद सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया है। सीआईएसएफ अब महज एक साल के लिए ही कर्मचारियों के वाहनों को गेट पास जारी कर रही है। इतना ही नहीं ड्यूटी पाइंट के मुताबिक जिस गेट से कर्मचारी की एंट्री है अब उन्हें उसी गेट से आने-जाने का पास दिया जा रहा है। व्यवस्था में बदलाव के बाद सभी थर्मल कर्मियों को अपने गेट पास फिर से बनवाने पड़ रहे हैं। जिसे लेकर उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया है।
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देने पड़ रहे सारे कागज
अभी तक कोटा थर्मल प्रशासन ही कर्मचारियों के वाहनों का गेट पास बनाता रहा है, लेकिन इस बार यह काम सीआईएसएफ खुद कर रही है। इतना ही नहीं गेट पास बनाने के लिए वाहनों की आरसी और इंश्योरेंस से लेकर कर्मचारियों का ड्राइविंग लाइसेंस तक मांगा जा रही है। जिससे गाड़ी और कर्मचारी की पहचान एवं प्लांट की सुरक्षा पुख्ता की जा सके। ऐसे में तमाम कर्मचारियों को अपने वाहनों के कागजों का रिनुअल कराना पड़ रहा है। पहले एक कर्मचारी के पास एक से ज्यादा वाहनों के गेट पास बना दिए जाते थे, लेकिन अब सिर्फ एक टू व्हीलर और एक फोर व्हीलर व्हीकल जिसकी आरसी कर्मचारी के नाम होगी सिर्फ उसी का गेट पास बनाया जा रहा है। इस परेशानी के चलते वे नई व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं।
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नहीं करेंगे कोई समझौता
गेट पास को लेकर कर्मचारियों के विरोध को दरकिनार करते हुए कोटा थर्मल के मुख्य अभियंता केसी अग्रवाल ने कहा कि प्लांट की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। प्लांट की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ की है। वह अपने स्तर पर जांच की जो प्रक्रिया अपना रहे हैं वह प्लांट के हित में ही है। इसलिए थर्मल कर्मियों को विरोध करने के बजाय व्यवस्था बनाने में सहयोग देना चाहिए।
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