धीरेंद्र् जोशी/उदयपुर. आदिम जातियों के उत्थान के लिए सरकार की ओर से कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में से अधिकांश में खानापूर्ति कर इतिश्री कर ली जाती है। एेसा ही मामला शुक्रवार को जनजाति संग्रहालय स्वरूप एवं विकास संगोष्ठी में सामने आया। संगोष्ठी में गिनती के लोग शामिल हुए।
माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान की ओर से शुक्रवार को संस्थान सभागार में ही जनजाति संग्रहालय 'स्वरूप एवं विकासÓ विषय पर संगोष्ठी रखी गई। इस संगोष्ठी में देवस्थान के अतिरिक्त आयुक्त दिनेश कोठारी, एडिशनल कमिश्नर अंजली राजौरिया, मुख्यवक्ता के रूप में पूर्व संग्रहालय इंचार्ज भगवानलाल कच्छावा, टीआरआई के डायरेक्टर दिनेशचंद्र जैन मंचासीन थे।
जानकारी के अनुसार संगोष्ठी में विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, आर्कियोलॉजी, साहित्यकार आदि को निमंत्रित किया गया था। लेकिन संगोष्ठी के दौरान गिनती के विशेषज्ञों ने ही इसमें भाग लिया। टीआरआई सभागार में हुई इस संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने जनजाति संग्रहालय 'स्वरूप एवं विकासÓ विषय पर अपनी-अपनी राय रखी।
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