Saturday, 29 December 2018

खुद से उगने वाली जंगली वनस्पति के भाव सुनेंगे तो दंग रह जाएंगे

उदयपुर/ कोटड़ा. उपखड के राजस्व क्षेत्र में मिलने वाले आंवल पौधे की पत्तियों की इस बार रिकॉर्ड तोड़ लागत में नीलामी हुई है। बीते तीन सालों में सबसे अधिक लागत में हुई नीलामी की वजह दो खरीदार पार्टियों के बीच प्रतिस्पद्र्धा रही। सभी चार ब्लॉक पर लगी बोलियों में सबसे अधिक बोली कोटड़ा ब्लॉक पर लगी। प्रतिस्पद्र्धा के बीच यह लागत 10 गुना से अधिक रही। तकरीबन 3 ब्लॉक को बोली 50 हजार से अधिक हो जाने कारण मामला जिला कलक्टर के पास भिजवाया गया है।
पुराने आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2015 में कोटड़ा ब्लॉक की बोली 16 हजार 100 रुपए में उठी थी। वहीं कुकावास ब्लॉक 21 हजार, मेरपुर ब्लॉक 9 हजार व मामेर ब्लॉक का ठेका 21 हजार 500 में उठा था। इसी तरह वर्ष 2016 में मामूली बढ़ोत्तरी के साथ ब्लॉक कोटड़ा 17786, कुकावास 23200, मेरपुर 9950 व मामेर 23500 तथा वर्ष 2017 में मामूली बढ़त के साथ कोटड़ा 20100, कुकावास 25100, मेरपुर 11150 व मामेर का ठेका 25 हजार 100 रुपए में छूटा था। इस बार गुरुवार शाम को कोटड़ा तहसील परिसर में आयोजित बोली में कोटड़ा ब्लॉक की बोली 2 लाख 26 हजार, कुकावास 2 लाख 6 हजार, मेरपुर में नाममात्र बढ़त के कारण इस ब्लॉक की नीलामी 12 हजार 50 और मामेर ब्लॉक 60 हजार रुपए की बोली पर थमा।

काम आती हैं पत्तियां
कोटड़ा क्षेत्र के पहाडिय़ों पर बहुतायत में दिखाई देने वाले इस पौधे को इस क्षेत्र में आंवल के नाम से जानते हैं। इसकी ऊंचाई तकरीबन 1 फीट से 3 फीट तक होती है। इसमें पीले रंग के फूल भी लगते हैं व फलियां भी लगती हंै। अमूमन तो इस पौधे की छाल का इस्तेमाल चमड़ा पकाने में होता है। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों से इसकी सप्लाई कोटड़ा क्षेत्र से पाली जिले के सोजत शहर में अधिक हो रही है। क्षेत्र में इसकी उपज बहुतायत में होने के कारण हर दूसरे दिन कोटड़ा क्षेत्र से एक गाड़ी भरकर सोजत जाती है। सोजत शहर मेहंदी के उत्पादन के लिए प्रख्यात है। सूत्रों का कहना है मेहंदी के उत्पादन के लिए इसकी पत्तियों का इस्तेमाल होता रहा है। इसकी पत्तियां चिकनी होने कारण इसे महीन पीसकर मेहंदी के साथ मिलाकर ही मेहंदी का पाउडर तैयार होता है।

 

 



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