Wednesday, 4 November 2020

ऐसे तो बन जाएगा कोरोना में बन जाएगा इतिहास

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. सरकार ने कोरोना की वैक्सीन लाने की तैयारियां शुरू कर दी है। हर जिले में इसे लेकर तेजी नजर आ रही है। बड़ी बात ये है कि यदि संभावित मार्च माह में कोरोना की वैक्सीन आ जाती है, तो ये दुनिया भर में खोजी जाने वाली पहली तेज वैक्सीन होगी। अब तक दुनिया में विभिन्न बीमारियों की खोजी गई वैक्सीन की औसत खोज का समय 10.7 वर्ष है। सर्वाधिक समय एचआईवी की वैक्सीन खोजने में लगा है, जो अब तक नहीं खोजी गई है। इसका ट्रायल 36 वर्ष से हो रहा है, जो अब भी जारी हैं।
----

सबसे ज्यादा समय लगा चिकनपोक्स की वैक्सीन खोज में
दुनिया में अब तक सर्वाधिक समय चिकनपोक्स की वैक्सीन तलाशने में लगा है। जिसकी ट्रायल 1954 से शुरू हुई जो, 1988 में सफलता पूर्वक खोजी गई। इस खोज में 34 वर्ष लगे। सबसे कम समय में अब तक मम्स की वैक्सीन चार वर्ष में खोजी गई।

----
ऐसे खोजी गई अन्य वैक्सीन

वैक्सीन - समय
- पोलियो के लिए बनी वैक्सीन- 7 वर्ष (1948-1955)

- मिजल्स- 9 वर्ष (1954-1963)
- चिकनपोक्स- 34 वर्ष (1954-1988)

- मम्स- 4 वर्ष (1963-1967)
- एचपीवी- (1991-2006)

- एचआईवी-( 36 वर्ष से जारी...)
------

ये देश कर चुके हैं वैक्सीन खोज में सफलता की तैयारी

अब तक ये कहा जा रहा है कि रूस, अमरीका, चीन, इजराइल कोरोना की वैक्सीन खोज की सफलता के लिए प्रयासरत हैं, जबकि रूस ने तो इसकी घोषणा भी कर दी थी। हालांकि इसे अब तक विश्व स्वास्थ्य संगठन की हरी झंडी नहीं मिली है।
------

सबसे कम समय में खोजी गई मम्स वैक्सीन
सबसे कम समय में जो वैक्सीन खोजी गई वह मम्स की है। यदि कोरोना की वैक्सीन मार्च तक आ जाती है तो यह दिसम्बर, 19 से लेकर अब तक यानी करीब 15 माह में आने वाली वैक्सीन होगी, जो देश दुनिया में खोजी गई अब तक की सबसे तेज गति की वैक्सीन होगी।

डॉ. अक्षय व्यास, डब्ल्यूएचओ प्रतिनिधि, उदयपुर
अब तो जो भी वैक्सीन खोजी गई है, वह बेहद प्रभावी रही है, इसका असर सीधा नजर आ रहा है। अब तक कोरोना को लेकर जो देश वैक्सीन खोजने का दम भर रहे थे, वह नकार दिए गए है। अब सफलतम वैक्सीन कब तक आती है ये देखना होगा। यदि पहले की तरह ही सफलतम वैक्सीन आए और असर दिखाए तो यह जीवनदायिनी होगी।

डॉ. लाखन पोसवाल, प्राचार्य आरएनटी मेडिकल, कॉलेज



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2Gu6QwZ
via IFTTT

No comments: