Wednesday, 4 November 2020

करोड़ों खर्च कर दिए और हालात ऐसे

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. सब्जी विक्रेताओं को सही तरीके से बिठाने और चौक खाली करवा आम लोगों का आवागमन ठीक करने के लिए नगर निगम ने करोड़ों रुपए खर्च कर सब्जीमंडियां तो तैयार कर ली, लेकिन अब ये सब्जी मंडिय़ां किसी काम नहीं आ रही। हालात ये है कि सब्जीमंडियों में बैठने के लिए सब्जी विक्रेता तक तैयार नहीं हैं। हाथीपोल स्थित सब्जीमंडी तो पूरी तरह से विरान पड़ी है, वहीं मुखर्जी चौक स्थित सब्जी मंडी के अन्दर के हिस्से में कुछ सब्जी विक्रेता बेतरतीब तरीके से बैठ रहे है तो उसकी ऊपरी मंजिल पूरी तरह से खाली हैं।

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ये हुआ है खर्च

- नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार हाथीपोल स्थित सब्जी मंडी को एक कॉम्पलैक्स के तौर पर करीब डेढ़़ करोड़ रुपए खर्च कर तैयार किया गया था। हालात ये है कि अभी इस सब्जी मंडी में एक भी विक्रेता बैठने के लिए तैयार नहीं है। मंडी के मुहाने कुछ सब्जी विक्रेता बाहर बैठे थे, जबकि अधिकांश विक्रेता हाथीपोल के दोनों हिस्सों में बाहर सड़क पर ही डेरा डाल चुके हैं। हालात ये है कि इन विक्रेताओं के कारण यातायात कर्मियों को खासी मशक्कत उठानी पड़ती है। यहां अक्सर सब्जी खरीदने वालों के कारण जाम की स्थिति बन जाती है। इस मंडी मे करीब 62 लोगों को लाइसेंस दे रखे हैं। समीप ही दुकान करने वाले व्यवसायी हुसैनी भाई का कहना है कि यहां मंडी के समीप गली में गंदगी का अंबार है, शराबियों ने यहां डेरा डाल रखा है।

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मुखर्जी चौक स्थित सब्जी मंडी को तैयार करने में करीब 25 लाख रुपए खर्च हुए है, इसमें कुछ हिस्सों में जरूर कुछ सब्जी विक्रेता बेतरतीब तरीके से बैठते है तो अधिकांश फल व सब्जी विक्रेताओं ने मंडी के बाहरी हिस्से में चौक पर ही कब्जा जमा रखा है, ऐसे में यहां हरदम भीड़ जमी रहती है। यहां से निकलता तक मुश्किल है। बनाए गए सब्जी मंडी भवन के कोने में जो टॉयलेट बना रखे हैं, वह सड़ांध मारते है, तो ऊपरी हिस्से पर जैसे कचरा व गदंगी पसरी हुई है। सब्जी विक्रेता राजु भाई का कहना है कि अधिकांश को ऊपरी मंजिल पर बैठने के लिए कहा गया था, ऐसे में वहां कोई बैठने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि सबका मानना है कि कोई ऊपरी मंजिल पर चढ़कर सब्जी लेने आएगा ही नहीं, नीचे भी लोग टॉयलेट की बदबू की समस्या के कारण बाहर बैठ रहे हैं। यहां करीब 162 लाइसेंस दिए गए हैं।

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तीज का चौक स्थित मंडी में बैठने की व्यवस्था विक्रेताओं ने अपने स्तर पर कर रखी है, सड़क पर ही बरसों से ये सब्जी बेच रहे हैं, यहां आए दिन आपसी विवाद होते रहते हैं, पहले यहां नगर निगम का दल पहुंचा था, जिसने उन्हें वहां ही जगह तय कर दी थी।

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ये है लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया व खर्च लाइसेंस बनाने के लिए एक आवेदन नगर निगम में किया जाता है, इसके लिए विक्रेता को वार्षिक 450 रुपए खर्च करने होते हैं। प्रतिवर्ष इसे अपग्रेड करने के लिए 450 रुपए खर्च करने होते हैं।

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मुखर्जी चौक स्थित मंडी भवन में विक्रेताओं के चढऩे के रेंप नहीं है, इसलिए हम इसे तैयार करवा रहे है। इसे ठीक करने के बाद हम मुखर्जी चौक में जो बैठते हैं, उन्हें अन्दर बिठाएंगे। ताकि वह जगह खाली हो सके। साथ ही हाथीपोल में भी साफ सफाई करवा अगले चरण में विक्रेताओं को बिठाएंगे।

जीएस टांक, महापौर नगर निगम उदयपुर



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